बॉस की पत्नी

मेरा नाम दीपक है और मैं फरीदाबाद में नौकरी करता हूं, मुझे यहां पर नौकरी करते हुए काफी समय हो गया है और मैं इसी ऑफिस में 5 वर्षों से काम कर रहा था लेकिन मेरी सैलरी ग्रोथ नहीं हो रही थी इस वजह से मैंने किसी और कंपनी में अपना इंटरव्यू दे दीया। जब मैं दूसरी कंपनी में गया तो वहां पर मुझे बहुत अच्छी सैलरी मिल रही थी इसलिए मैंने सोचा कि मुझे वहीं पर ज्वाइन कर लेना चाहिए और मैंने अब दूसरी कंपनी में ही ज्वाइन कर लिया। जब मैंने वहां जॉइनिंग की तो मुझे उन लोगों ने बहुत ही अच्छी सैलरी ऑफर की और अब मैं खुश था क्योंकि मैं पहले जिस कंपनी में काम कर रहा था वहां पर मेरी सैलरी ग्रोथ बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी और मेरे साथ में जिन लोगों ने ज्वाइन किया था उन लोगों की सैलरी बहुत ही अच्छी हो गई थी। जिस कंपनी में मैंने अब जॉइन किया है वहां पर मेरे बॉस का नाम प्रभाकर है और वह एक बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं, उनका बात करने का तरीका बहुत ही अच्छा है और मुझे उनसे बात करते हुए काफी अच्छा लगता है।

वह अपनी बात को बहुत ही अच्छे से अपने सारे स्टाफ को बताते हैं जिससे कि हम सब लोग उनकी बात को समझ जाते हैं और उनकी बात पर ध्यान देकर अपना काम करते हैं। वह अपना काम निकालना अच्छे से जानते हैं और उन्हें पता है कि किस व्यक्ति से किस तरीके से काम निकाला जा सकता है इसलिए सारे लोग उनके लिए बहुत अच्छे से काम करते हैं। एक दिन उनकी पत्नी हमारे ऑफिस में आ गए। मैंने जब उनकी पत्नी को देखा तो मुझे उन्हें देखकर अंदर से एक अलग ही तरह की फीलिंग आने लगी और मुझे लगने लगा कि मुझे उनसे बात करनी चाहिए। जब वह हमारे ऑफिस में आई तो प्रभाकर सर ने मेरी अपनी पत्नी से मुलाकात करवाई, उनका नाम पायल है। जब उन्होंने मुझसे उन्हें मिलाया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा और मैंने उन्हें कहा कि मुझे आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई और वो भी कहने लगी कि मुझे भी आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई। वो  प्रभाकर सर को कहने लगी कि कभी इन्हें घर पर डिनर में इनवाइट करो, सर ने कहा ठीक है दीपक तुम किसी दिन हमारे घर पर आ जाना। मैंने कहा सर यह तो मेरी खुशकिस्मती होगी यदि आप मुझे अपने घर पर बुलाएं, वह हंसने लगे और कहने लगे कि तुम्हें क्या लगता है मैं तुम्हें अपने घर पर नहीं बुला सकता। मैंने उन्हें कहा सर ऐसी कोई बात नहीं है।

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पायल कहने लगी कि आप हमारे घर पर अगले हफ्ते आ जाइए। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं आपके घर पर अगले हफ्ते आ जाऊंगा। अब मैं अगले हफ्ते प्रभाकर सर के घर पर चला गया और जब हम लोग उनके घर पर बैठे हुए थे तो वह बिल्कुल भी मुझसे अपने बॉस के तरीके से बात नहीं कर रहे थे वह एक दोस्त के तरीके से मुझसे बात कर रहे थे। वह मुझसे मेरे घर के बारे में पूछने लगे, मैंने उन्हें सब कुछ बताया और उसके बाद मैंने उनसे भी उनकी शादी के बारे में पूछा तो वो कहने लगे कि मेरी शादी को काफी समय हो चुका है पायल को मेरे घर वालों ने ही पसंद किया था और उसके बाद हम दोनों की शादी हो गई, हम दोनों ने अरेंज मैरिज की और अब हमारे घर वाले भी हमारी शादी से बहुत खुश हैं। मैंने उनसे पूछा कि आपके बच्चे कहां है तो वह कहने लगे कि वो लोग बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते हैं। जब उनकी छुट्टियां पड़ती है तब वह घर पर आते हैं। अब मैंने उनके घर पर डिनर किया और डिनर करने के तुरंत बाद ही मैंने कहा कि मैं अब चलता हूं क्योंकि मुझे घर के लिए देर हो रही है। उस दिन प्रभाकर सर और उनकी वाइफ मुझे मेरे घर तक छोड़ने आए क्योंकि मेरा घर उनके घर से काफी दूर था इसलिए उन्हें ही मुझे छोड़ने के लिए आना पड़ा। मेरे और प्रभाकर सर के बीच में बहुत सी अच्छी बातचीत हो चुकी थी और हम लोग एक दूसरे के साथ अब दोस्त के तरीके से बर्ताव करते थे। उनका नेचर मुझे बहुत ही अच्छा लगता है और मैं हमेशा ही उनसे बहुत प्रभावित होता हूं क्योंकि उन्होंने अपने शुरुआती दौर में बहुत ही मेहनत की है, उसके बाद उन्हें सफलता मिल पाई। वह मुझे जब बताते हैं कि मैंने शुरुआती दौर में किस प्रकार से मेहनत की थी उसके बाद ही मुझे सफलता मिल पाई है।

पायल भाभी भी अक्सर हमारे ऑफिस में आ जाया करती थी और जब वह हमारे ऑफिस में आती तो मुझे उनसे बात करके बहुत अच्छा लगता था और मैं उनसे हमेशा ही बात किया करता था। वह मुझे कहते कि तुम अगली बार कब हमारे घर पर आ रहे हो। मैंने उन्हें कहा कि जब आप इनवाइट करें तब मैं आपके घर पर आ जाऊंगा और वह मुझसे काफी मजाक भी किया करती थी वह कहती थी कि तुम बहुत ही अच्छे लड़के हो। अब हमारे बीच में घरेलू संबंध हो चुके थे और मैं ऑफिस में बहुत ही अच्छे से काम किया करता था। मेरे काम में उन्हें किसी भी प्रकार से कोई शिकायत नहीं मिलती थी इसलिए वह मेरे काम से भी खुश रहते थे और सब को मेरा एग्जांपल दिया करते थे कि दीपक अपने काम के लिए कितना समर्पित रहता है और अपने काम को बहुत ही अच्छे तरीके से करता है। जब वह इस प्रकार से कहते थे तो मुझे भी कहीं ना कहीं बहुत ही खुशी होती थी। वो जब भी कहीं बाहर जाते तो मैं ही ऑफिस का सारा काम देखा करता था।

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एक बार प्रभाकर सर ऑफिस के काम से कहीं बाहर गए हुए थे और उसी बीच पायल भाभी भी ऑफिस में आ गई। जब वह ऑफिस में आई तो वह सर के केबिन में बैठ गई मुझे उन्होंने अपने पास बुला लिया। जब मैं उनके केबिन में गया तो मैंने उन्हें पूछा कि आपको कुछ जरूरत तो नहीं है। वह कहने लगी नहीं तुम यहीं बैठ जाओ हम दोनों बैठकर बातें कर रहे थे। वह मुझे कहने लगी कि प्रभाकर ने मेरी चूत कई बरसों से नहीं मारी है तुम मेरी इच्छा पूरी कर दो। तुम मुझे चोदोगे तो मुझे बहुत ही अच्छा लगेगा जब तुम पहली बार मेरे घर आए थे तो मुझे तुम्हें देखकर उसी दिन से फीलिंग आने लगी है। जब यह बात उन्होंने कही तो मैंने अपने लंड को पैंट से बाहर निकाल दिया और उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया। जब उन्होंने मेरे लंड को मुह मे लेकर चूसा तो मेरा पानी निकलने लगा और मुझे बहुत अच्छा लगा वह मेरे लंड को बहुत ही अच्छे से चूस रही थी। मैंने भी उनकी चूत को बहुत ही अच्छे से चाटा जिससे कि उनकी चूत से पानी निकलने लगा वह उत्तेजना में आ गई।

मैंने जैसे ही अपने लंड को उनकी चूत मे डाला तो मूड मे आ गई मै बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था। उनकी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्मी निकलने लगी मुझसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उनकी चूत के अंदर ही अपना माल गिरा दिया। मैने उन्हें घोड़ी बना दिया और उनकी गांड को चाटना शुरू कर दिया। उनसे रहा नही गया वह पूरे मूड में आ गई और उन्होंने कहा कि तुम अपने लंड को मेरी गांड मे डाल दो। मैंने जैसे ही उनकी गांड में अपना लंड लगाया तो उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया और मैने तुरंत ही उनकी गांड मे अपना लंड डाल दिया। मैंने जैसे ही उनकी गांड में लंड डाला तो वह चिल्ला उठी और मेरा लंड पूरी तरीके से छिल चुका था क्योंकि मैंने आज तक किसी की गांड नही मारी थी। जैसे ही मै अपने लंड को उनकी गांड में डाल रहा था तो मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा था और उन्हें भी बहुत तेज दर्द हो रहा था। वह कहने लगी कि मुझे बहुत ही ज्यादा दर्द हो रहा है काफी देर तक तो मैं उन्हें धक्के मारता रहा। वह भी पूरे मूड में आ गई और मुझसे अपनी चूतडो को मिलने लगी। वह अपनी चूतडो को मुझसे इतनी तेजी से मिला रही थी कि मुझसे भी बिल्कुल नहीं रहा जा रहा था। मैंने भी उनकी चूतडो को कसकर पकड़ लिया और उनकी चूतडे पूरे लाल हो गई। मैंने बड़ी तजी से झटके मारे जिससे कि उनकी चूतडो का रंग ही बदल गया। मैं उन्हें झटके दिए जा रहा था वह कहने लगी कि तुम ने मेरी गांड को अच्छे से मार दिया आज तक कभी भी प्रभाकर ने  मेरी रसीली गांड की तरफ देखा ही नहीं और ना ही वह मेरी चूत मारते हैं। मैं उन्हें झटके मार रहा था जिससे कि उनका शरीर पूरा दर्द होने लगा और वह कहने लगी मुझे बड़ा ही मजा आ रहा है जब तुम इस प्रकार से मेरी गांड मार रहे हो। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन उनकी गांड से गर्मी बाहर आने लगी और उनका बदन पूरा गर्म हो चुका था। जैसे ही मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकलते हुए उनकी गोरी और मुलायम गांड पर अपना माल गिरा दिया। उसके बाद से तो अक्सर हम दोनों के बीच में सेक्स संबंध बनते रहते हैं क्योंकि प्रभाकर सर  उन्हें कभी भी नहीं चोदते है।

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