अनजान भाभी और मेरे लौड़े की हवस–1

हेल्लो दोस्तो,सभी चूत की देवियों और लंड के महाराजाओ को मेरा प्रणाम। मै रोहित एक बार फिर से हाज़िर हूं चूत चुदाई के सफर में। मैं 26 साल का लौंडा हूं और मेरा लंड 7 इंच का है जो किसी भी चूत या भोसड़े की बखिया उधेड़ और बुन सकता है। दोस्तो जो मज़ा मस्त कसे हुए बदन को पेलने में आता है ना उसकी बात ही अलग है। मैंने ऐसे मस्त मालो को पेलकर जमकर मज़ा लूटा है।    

मेरी ये कहानी कुछ साल पहले की है जब मै 21 साल का था। तब तक मै कई चुतो में लंड डाल चुका था। एक दिन मै बाइक से मेरे मामाजी के यहां का रहा था। पूरी सड़क टूटी फूटी थी। रास्ते के खड्डे  मेरा दिमाग खराब कर रहे थे।रास्ते में मुझसे कई लोगो ने लिफ्ट मांगी लेकिन रास्ता खराब होने की वजह से मैंने किसी को कोई लिफ्ट नहीं दी।सड़क के इन्हीं खड्डों से गुजरते हुए लगभग 10 किलोमीटर का सफर खत्म हो चुका था। तभी एक गांव के अंतिम छोर पर दो तीन औरतें खड़ी हुई थी।उन्होंने मेरी गाड़ी रुकवाई तो मैंने गाड़ी रोक दी। तभी वो कहने लगी–आप कहां तक जाओगे?मैं–आपको क्या काम है? वो बताओ?मैंने अक्कड़कर कहा।औरतें–इसको इसकी बुआ  के यहां जगपुरा जाना है। आप इसको वहां तक छोड़ सकते हो क्या?मैं – रोड खराब है। मैं लिफ्ट नहीं दे सकता।औरतें– आपकी बात सही है लेकिन यहां कोई साधन आ भी नहीं रहा है। आप कैसे भी करके इसको जगपुरा तक छोड़ दो प्लीज।वो औरतें मुझसे बहुत ज्यादा मिन्नते करने लगी। तभी मैंने विचार विमर्श करते हुए उस औरत को ऊपर से लेकर नीचे तक नज़र मारकर देखा जिसको लिफ्ट देनी थी, तो मेरी आंखो में काम वासना  जाग उठी और मेरा लौड़ा पैंट में हलचल करने लगा।तभी मेरे लौड़े ने कहा–ज्यादा मत सोच और इस शानदार माल को उठा ले।बाकी सब रास्ते में देख लेंगे।                              

 ये भाभी लगभग 27–28 साल की होगी। भाभी दिखने में छोटी कदकाठी,  गोरे चिकने छरहरे बदन की मालकिन थी।उनका पूरा बदन भरा और कसा हुआ था।उनके चेहरे पर तेज़ था जिस पर गुलाबी पंखुड़ियों जैसे होंठ अपनी चमक बिखेर रहे थे। उनकी कंधो से नीचे आती हुई कलाइयां गौर वर्ण से चमक रही थी। भाभी के बोबे लगभग 32 इंच के थे जो उनके ब्लाउज में कैद थे।भाभी की लगभग 30 इंच की कमर जिस पर उनकी नाभि के नीचे बैंगनी रंग की जालीदार साड़ी कसी हुई थी। जालीदार साड़ी में भाभी का गोरा चिकना पेट साफ़ साफ़ नजर आ रहा था। इन सब के साथ भाभी की  34 इंच गांड़ मेरे लौड़े को उत्तेजित करने लगी।                              

तभी मैंने चूत वासना से अभिभूत होकर कहा– लेकिन रास्ते में कहीं कुछ हो गया तो,मेरी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।औरतें– आप चिंता मत करो।आप पर कोई आंच नहीं आयेगी।मैं– ठीक है। बैठो भाभी।तभी भाभी मुस्कुराती हुई मेरे कंधे पर हाथ रखकर बाइक पर बैठ गई।तभी उन औरतों ने भाभी को बेग पकड़ा दिया।अब भाभी ने बेग को गोद में रखा और उनसे टाटा टाटा बाय बाय करने लगी।वो औरतें कहने लगी– भैया आराम से लेकर जाना।मैं– हां, ठीक है। मैं भाभी को आराम से ही लेकर जाऊंगा।आप निश्चिंत रहो। अब हमारा सफर शुरू गया। भाभी ने एक हाथ मेरे कंधे पर रख रखा था और दूसरे हाथ से बेग को पकड़ रखा था। रास्ते की उबड़ खाबड़ सड़क भाभी को परेशान करने लगी। धीरे धीरे भाभी का मादक बदन मेरे जिस्म से टच होने लगा और मेरा सोया हुआ लौड़ा फिर से भोसड़े में उथल पुथल बचाने के लिए तैयार होने लगा। इधर भाभी की बदन पर लिपटी हुई उनकी नई जालीदार साड़ी की महक आग में घी का काम कर रही थी। भाभी के बदन की खुशबू मेरे लौड़े के शौले को भड़का रही थी। तभी मैंने सोचा– एक तीर तो इस भाभी पर चलाकर देखा जाए।कोशिश करने में कोई हर्ज नहीं है।हो सकता है तीर निशाने पर लग ही जाए और इस भाभी की चूत मारने का मौका मिल जाए।अब मैं जानबूझकर बाइक को गड्ढों में गिराने लगा जिससे भाभी आगे खिसककर मेरे जिस्म से चिपक जाती और उनके बड़े बड़े बूब्स मेरे जिस्म में आग लगाने लगा। अब मै जानबूझकर पीछे खिसककर भाभी के बड़े बड़े चूचों को दबाने लगा। मुझे उनके चूचों को रगड़ने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था।भाभी चुप थी और खुद को सम्हालने की पूरी पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन सड़क के बड़े बड़े गड्डे उनकी एक नहीं चलने दे रहे थे।वो कभी बेग को सम्हालने की कोशिश करती तो कभी खुद के नाजुक बदन को। भाभी कभी पीछे खिसक जाती लेकिन फिर थोड़ी ही देर में गड्डे उन्हें आगे खिसका देते। अब ये बात भाभी भी अच्छी तरह से जान चुकी थी कि उनका बदन मेरे जिस्म से रगड़ खा रहा है। भाभी के मादक बदन की रगड़ मेरे लन्ड को पागल करने लगी।धीरे धीरे मेरा लौड़ा पूरी तरह फूलकर कुप्पा हो गया। अब मैं बाइक चलाते हुए  मेरे लन्ड को पकड़कर मसलने लगा और भाभी की चूत ठोकने के बारे में सोचने लगा। लेकिन अनजान भाभी की चूत मारना कोई आसान काम नहीं था। भाभी खुद को मुझसे दूर रखने की पूरी पूरी कोशिश कर रही थी। अब मैं समझ चुका था कि भाभी आसानी से चुदने वालो में से नहीं है।ज़रूर इन्होंने सिर्फ अपने पति का ही लंड चूत में ठुकवाया है।अगर ये भाभी चुदने में माहिर खिलाड़ी होती तो अबतक लंड मांगने लग जाती। इनको चोदने के लिए कुछ ज्यादा ही कोशिश करनी पड़ेगी।  तभी मेरे दिमाग में आइडिया आया पहले लोहे को गरम किया जाए। फिर गरमा गर्म लोहे पर हथौड़ा मारा जाए। कुछ ही देर बाद  मैंने बाइक को बड़े गड्डे में पटक दिया और भाभी उछलकर बुरी तरह से मेरे जिस्म से चिपक गई । भाभी के मुलायम बदन की रगड़ से मेरे जिस्म में २०० वाट का करंट दौड़ गया और लौड़ा तनकर खड़ा हो गया। अब मैंने बाइक रोक दी। भाभी चुप थी।वो जानती थी कि उनके मोटे मोटे बोबे मेरे जिस्म से बुरी तरह से रगड़ खा चुके हैं।तभी उन्होंने साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए फिर से अपने मोटे मोटे स्तनों को ढक लिया। तभी मैंने मौके की नजाकत को समझते हुए कहा– भाभी आपको बैठने में दिक्कत हो रही है।लाओ बेग मुझे दे दो।फिर आप अच्छे से बैठ पाओगी।भाभी– नहीं आप परेशान मत होवों। मैंने बेग को पकड़ रखा है।मैं– भाभी सड़क पर बड़े बड़े खड्डे है।आप बेग मुझे दे दो। मैं बेग को आगे टंकी पर रख लूंगा फिर आप मुझे पकड़कर  अच्छे से बैठ जाना।भाभी– लेकिन मै आपको पकड़कर कैसे बैठ सकती हूं?लोग क्या सोचेंगे।मैं– भाभी,मुझे आपका देवर समझिए और पकड़कर बैठ जाइए।  आप लोगो के बारे में मत सोचिए। पहले आप की सुरक्षा ज़रूरी है।भाभी–बात तो तुम्हारी ठीक है लेकिन………….मैं– भाभी लेकिन वेकीन को छोड़िए और लाओ बेग मुझे दो। इतना कहकर मैंने भाभी के हाथ में से बेग लेे लिया।। अब मैंने बाईक स्टार्ट की और बेग को आगे टंकी पर रख लिया।  भाभी मुझे पकड़ कर बैठने में सकपका रही थी । तभी मैंने भाभी से कहा– भाभी शरमाओ मत और मुझे पकड़ लो।नहीं तो आप गिर जाओगी।तब जाकर भाभी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझसे चिपक कर बैठ गई। अब भाभी का कोमल बदन पूरी तरह से मेरे जिस्म से टच हो रहा था।उनके बड़े बड़े बूब्स की कोमल चुभन मुझे पागल कर रही थी।हमारा सफर धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था।तभी मैंने भाभी पर निशाना साधते को हुए कहा– भाभी आप मेरी हालत खराब कर रही हो।भाभी– कैसे? मैं तो जैसे आपने कहा वैसे ही बैठी हूं।मैं– भाभी , आप खुद ही समझो ना।भाभी– ओह,लेकिन मै क्या करू? तुमने ही तो कहा था पकड़ने के लिए।मैं– हां ,भाभी।पकड़ने के लिए तो मैंने ही कहा था लेकिन अब कोई मुझे परेशान कर रहा है।भाभी–मतलब?मैं–भाभी मेरा वो।भाभी–अच्छा जी। आपका वो। इधर परेशान तो मै भी हो रही हूं लेकिन मैं  क्या करू? ये सड़क की खराब हालत मेरी भी हालत खराब कर रही है।तभी मैंने हंसते हुए कहा– ओह तो आपकी की भी हालत खराब हो रही है। मैं तो सोच रहा था कि मेरी ही हालत खराब हो रही है।भाभी– अब आप ज्यादा दिमाग मत लगाओ और गाड़ी को ध्यान से चलाओ।मैं– मै तो गाड़ी ध्यान से ही चला रहा हूं भाभी लेकिन आप ही मेरे ध्यान को भटका रही हो।भाभी– अरे देवरजी, खुद को कंट्रोल  करो ,नहीं तो ये खराब सड़क हड्डी पसली तुड़वा देगी।मैं– भाभी आप हड्डी पसली की बात कर रही हो।यहां तो मांस ही कठोर हड्डी बन चुका है।भाभी–अब इसका तो मै क्या इलाज़ बताऊं?तभी मैंने मास्टर स्ट्रोक मारते हुए कहा– भाभी, इलाज़ तो आपके पास ही है। आप ही   कठोर हड्डी को वापस मांस बना सकती हो।मेरी बात सुनते ही भाभी झेंप गई और चुप हो गई। मैं–भाभी चुप क्यों हो गई? कुछ तो बोलिए।आपकी खामोशी मुझे चुभ रही है। 

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अब मै समझ चुका था कि भाभी की चूत में भी शोले भड़क चुके है।समझदारी इसी में ही है कि भाभी की मंज़िल आने से पहले ही इनकी चूत के शोलो को लौड़े के पानी से ठंडा कर दिया जाए। मैं– भाभी आपने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया?भाभी– मै क्या जवाब दूं। कोई हड्डी को वापस मांस में बदलने वाली नहीं है क्या?मैं– नहीं भाभी,अभी तक तो कोई नहीं मिली है।भाभी– तो देवरजी ढूंढ़ लो।मैं–भाभी वो तो मै ढूंढ़ लूंगा लेकिन बात तो अभी की है ना। और इस टाइम सिर्फ आप ही मेरे गरम लोहे को आपकी ठंडी झील में नहला सकती हो।भाभी– नहीं देवरजी ,आपके गरम लोहे को ठंडा करने की मेरी बस की बात नहीं है। मैं कोई ऐसी वैसे नहीं हूं। मैं एक इज्जतदार घर की बहू और बेटी हूं।मैं– भाभी मैंने कब कहा कि आप ऐसी वैसी हो। मैं तो बस आपके झील की लहरों में गोते लगाने की बात कर रहा हूं। और वैसे भी आजकल तो सब मज़े लूटते है। भाभी– इसके लिए तो आपको कोई और ही ढूंढनी पड़ेगी।यहां आपकी दाल नहीं गलनी वाली।मैं– भाभी दाल तो गल सकती है लेकिन अगर आप चाहो तो।भाभी–बिल्कुल नहीं।आप गाड़ी चलाओ।इतना कहकर भाभी थोड़ा पीछे सरक गई लेकिन लेकिन बकरे की मां कब तक खैर मनाती। कुछ देर बाद भाभी ने वापस मुझे पकड़ लिया। अब मै सोचने लगा अगर भाभी की चूत के किले को भेदना है तो कुछ और ही करना होगा।हमारा सफर आगे बढ़ता जा रहा था और मेरी भाभी को चोदने की चाहत भी आगे उफनती जा रही थी लेकिन भाभी घास डालने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हो रही थी।तभी मैंने अचानक गाड़ी की स्पीड बढ़ाकर गाड़ी को खड्डे में पटक दिया। अचानक इस घटना से भाभी उछलकर मेरे ऊपर आ गई और भाभी का हाथ  मेरे कड़क लंड पर जा पहुंचा।।उनके बोबे बुरी तरह से मेरे जिस्म से रगड़ खा रहे थे। थोड़ी देर तक भाभी मेरे लन्ड को पकड़े रही फिर उन्हें अचानक ध्यान आया कि उनके हाथ में मेरा गरमा गर्म लंड है तो उन्होंने झट से हाथ को हटा लिया।लेकिन तब तक भाभी को मेरे मोटे हथियार का एहसास हो चुका था। भाभी एकदम से सकपका गई।मेरे लौड़े के एहसास ने उनके चेहरे का रंग फीका पटक दिया था।भाभी के मुंह से एक शब्द भी नहीं निकल पा रहा था। मैं भी चुपचाप गाड़ी चलाने लगा। मैं समझ चुका था कि भाभी की चूत ने अब भयंकर खलबली मचा दी है।इधर मेरा लन्ड भी भाभी को चोदने के लिए बेकरार हो चुका था। अब वो तनकर तूफान बन चुका था। लेकिन भाभी अभी भी अपने किले को ध्वस्त होने से बचाने में लगी हुई थी। मैं चुपचाप गाड़ी चला रहा था।मैंने भाभी से बिल्कुल भी बात नहीं की।तब भाभी को लगा कि उनसे नाराज़ हू। तभी भाभी ने कहा – भैया,  वो गलती से हो गया।आप मुझे प्लीज गलत मत समझना। मै–ठीक है भाभी। कोई बात नहीं। मैं आपको गलत नहीं समझ रहा हूं। लेकिन  एक बात कहूं? अगर आप बुरा नहीं मानो तो!भाभी–जी, कहो।मैं–आपकी गलती ने सोए शेर को जगा दिया है।भाभी– वो मेरा हाथ अचानक वहां पहुंच गया था लेकिन मैंने ऐसा जानबूझकर नहीं किया था।मैं–कोई बात नही भाभी। गलतियां हो जाती है। लेकिन अब आपको गलती की सजा तो भुगतनी पड़ेगी।भाभी–मै समझी नहीं भैया।मैं–  देखो,भाभी , आपने मेरा लन्ड पकड़ा और आपके कोमल कोमल हाथ लगने की वजह से मेरा लन्ड बहुत ज्यादा तन गया है। इसलिए अब आपको फिर से मेरे लन्ड को पकड़ना पड़ेगा।और वो भी अच्छी तरह से। अब मैं भाभी को मेरे जाल में फसाने की पूरी कोशिश कर रहा था। मैं जानता था कि अगर भाभी ने एकबार  मेरा लन्ड पकड़ लिया तो फिर मुझे इनको चोदने से कोई नहीं रोक सकता।मैं – भाभी आपने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया।भाभी–भैया, लेकिन मै कैसे पकड़ पाऊंगी? आप कोई और सजा दे दीजिए।मैं–नहीं भाभी,अगर आपको अपनी गलती का एहसास है तो फिर जैसा मैंने कहा है वैसा करो। नहीं तो मै समझ जाऊंगा कि आपको खुद की गलती का कोई एहसास नहीं है।भाभी–नहीं मै आपका वो नहीं पकड़ सकती हूं।भाभी की बात सुनकर मैं जानबूझकर चुप हो गया ताकि भाभी मेरा लन्ड पकड़ने के लिए खुद कहे।अब हम दोनों खामोश थे और सफर आगे बढ़ता जा रहा था।इसी बीच भाभी के मोटे मोटे बोबे लगातार मेरे जिस्म से टच हो रहे थे। मैं लड़ को मसले जा रहा था और भाभी भी कसमसा रही थी। भाभी के नाजुक बदन की खुशबू और रगड़ मुझे पागल कर रही थी लेकिन भाभी के नखरे खत्म होने का नाम नहीं ले रहे थे।                 

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अब मैं जान चुका था कि भाभी को लंड की जरूरत है।इनकी चूत में पानी छूट चुका है। अब बस इनको लंड का पूरा एहसास कराना है तभी भाभी खुद चूत में लंड ठुकवाने के लिए तैयार हो पाएगी। तभी मैंने बाईक हो एक हाथ से चलाने लगा और दूसरे हाथ से पेंट की ज़िप खोलकर लंड को बाहर निकाल लिया। अब शेर पिंजरे से आज़ाद हो चुका था और भाभी के जंगल में घमासान मचाने के लिए तैयार था। ।बस अब मुझे अंतिम प्लान को अमलीजामा पहनाना था। थोड़ी देर तक इस माहौल में हमारा सफर चलता रहा।सड़क पूरी सुनसान पड़ी हुई थी। तभी मैंने अचानक भाभी का हाथ पकड़कर मेरा लन्ड भाभी को पकड़ा दिया।भाभी चौंक गई और हाथ को हटाने लगी।भाभी– आप ये क्या कर रहे हो?मैं–भाभी मै वहीं कर राह हूं जिसकी आपको सख्त जरूरत है।भाभी–नहीं मुझको इसकी कोई जरूरत नहीं है।मैंने फिर से भाभी का हाथ मेरे लन्ड पर रख दिया।मैं– भाभी, आप ये बात कभी अपने आप नहीं कहोगी लेकिन मैं आपकी हालत समझ चुका हूं।भाभी– फालतू बकवास की बाते मत करो।और चुपचाप गाड़ी चलाओ।मैं–भाभी गाड़ी तो चल रही है बस आप आपकी झील को सैर करा दीजिए।भाभी–नहीं ,बिल्कुल नहीं।मैंने अभी भी भाभी को मेरा गरमा गर्म लौड़ा हाथ में पकड़ा रखा था।मैं– भाभी,अच्छा मौका है।मत चूको।भाभी– नहीं,मै ये काम बिल्कुल नहीं करने दूंगी।तभी मैंने इमोशनल होकर  भाभी से कहा–ठीक है भाभी।अगर आपकी इच्छा नहीं है तो कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है। मेरा लन्ड आपके हाथ में है।आप खुद ही महसूस कर रही होगी कि अगर ये आपकी चूत में जायेगा तो आपको कितना मज़ा दे सकता है।लेकिन अगर आप फिर भी चूदना नहीं चाहती हो तो आप हाथ हटा सकती हो। मैं आपको नहीं रोकूंगा।               

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इतना कहने के बाद भाभी खामोश हो गई लेकिन भाभी अपने कोमल हाथो से अभी भी मेरे गरम लौड़े को पकड़े हुए थी। अब मैंने भाभी के हाथ को छोड़ दिया और दोनों हाथों से बाइक को चलाने लगा। दोनो की खामोशी के साथ सफर आगे बढ़ रहा था। भाभी अभी भी मेरे लन्ड को पकड़े हुए बैठी थी।अब मैं जान चुका था कि भाभी चुदने के लिए तैयार है।बस अब सही जगह मिल जाए तो मेरे लन्ड को जल्दी ही भाभी की झील में डुबकी लगाने का मौका मिल जाए। थोड़ी देर भाभी ने कहा–आप जो कुछ भी करना चाहते हो वो कर सकते हो।आपके हथियार ने मुझे बहुत देर से परेशान कर रखा है। मैं– ठीक है भाभी।आज आपको मेरे लन्ड का पूरा जलवा दिखाऊंगा।आप तृप्त हो जाओगी।भाभी– जो करना है जल्दी करो। मैं पूरी भीग चुकी हूं।मैं– ठीक है भाभी।बस अच्छी सी जगह मिल जाए।अब भाभी को चोदने की खुशी में मेरा चेहरा खिल चुका था। अब मै सही जगह की तलाश करने लगा।               

अजब गजब नज़ारा था यारो जिस भाभी को मै बहुत देर से ठोकने के बारे में सोच रहा था।आखिरकार वो भाभी चूत में मेरा लौड़ा ठुकवाने के लिए मान ही गई। अब भाभी अच्छे से चिपककर मेरे लौड़े को हाथ में पकड़े हुए बैठी थी और मै बाइक चला रहा था।भाभी के नाजुक बोबे मेरे लौड़े में आग लगा रहे थे। बस अब इस आग को बुझाने की बारी थी।          

मैं सही जगह की तलाश करते हुए बाइक चला रहा था।तभी मैंने  कच्चे  रास्ते की तरफ बाइक मोड़ दी। वहां आसपास गेंहू और धनिया के खेत नजर आ रहे थे।थोड़ी दूर चलने पर एक वृद्ध महिला बकरियां चराती हुई नजर आईं।वहां आसपास छोटी सी खाड़ी और पेड़ो का झुरमुट था।मैंने भाभी से कहा–भाभी ये जगह सही है।तो भाभी ने कहा–अरे लेकिन यहां ये औरत है।तो मैंने कहा–वो सब मै सम्हाल लूंगा।भाभी मान गई।मैंने बाईक खड़ी की और उस महिला के पास गया।मैंने उसको २०० का नोट दिया और कहा –हम थोड़ी देर में आ रहे हैं।आप तब तक बाइक का ध्यान रखना।वो महिला मेरी बात समझ गई।अब मैंने भाभी का हाथ पकड़ा और लंड को मसलते हुए नीचे खाड़ी में लेे गया। थोड़ी देर में ही हम खाड़ी में दूर तक आ गए। यह बिल्कुल सुनसान जगह थी। खाड़ी में नीचे रेत और ऊपर कराईयो पर बोर की झाड़ियों लटकी हुई थी।        

तभी मैंने भाभी के हाथ में से बेग को नीचे पटक दिया और भाभी को कसकर बाहों में जकड़ लिया। अब मैं ताबड़तोड़ भाभी के रसीले होंठों की लिपस्टिक को खाने लगा। अब हम दोनों काम वासना में डूबने लगे।भाभी चुपचाप खड़ी थी और मै भूखे शेर की तरह उनके कोमल कोमल लबो को चूस रहा था। अब आउच पुच्छ पुच्छ पिच की आवाजे आ रही थी। थोड़ी ही देर में मैंने उनकी लिपस्टिक को चूसकर साफ कर दिया। अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था।तुरंत ही मैंने भाभी को नीचे रेत पर गिरा दिया।अब आगे…………………………….आपकी प्रतिक्रिया आमंत्रित है rohit24xx@gmail.com

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