नंदोई से चूत की प्यास मिटवाई

नमस्कार दोस्तो मेरा नाम कविता हैं। में 45 साल की हूं। में दिल्ली की रहने वाली हूं। कहानी शुरू करने से पहले मैं अपना परिचय दे देती हूं।
में यहां दिल्ली में अकेले रहती हूं। मेरे पति की मौत को 10 साल बीत चुके हैं। मेरे 2 बच्चे हैं और दोनों नैनीताल में पढ़ते हैं और वहां हॉस्टल में रहते हैं। मेरे पति का एक बिजनेस था, जिसे अब मेरा भाई देखता है । पति के जाने के बाद में बिल्कुल अकेले ही गई थी पर वक़्त के साथ साथ जीना सीख लिया । लेकिन मेरे शरीर की भूख दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी। शायद बच्चो की देखभाल में इतना व्यस्त हो गई थी कि कभी अपने अकेलेपन पर ध्यान है नहीं दिया। इस वजह से पति के मरने के 6 साल बाद तक मैंने कभी सेक्स ही नहीं किया। फिर वो दिन आया जब मुझे सेक्स मिला और ऐसा सेक्स जो शायद ज़िन्दगी में कभी ना मिला।

बात सर्दियों की हैं मेरी ननद जो बंगलौर में रहती हैं उस का मेरे पास कॉल आया। उसने बात बात में मुझे बताया के उसका पति सागर को दिल्ली आना है किसी काम से तो वो दो दिन मेरे यहां ही रहेगा।
सागर का बंगलौर में अपना जिम हैं और वो यहां दिल्ली में एक जिम खोलना चाहता हैं। इस कारण से उसकी कुछ इनवेस्टर के साथ मीटिंग हैं। मेरी ननद मेरे पति से छोटी हैं। सागर की उम्र 32 साल की हैं।
एक हफ्ते बाद वो दिन आ गया जब सागर को दिल्ली आना था। मैंने एयरपोर्ट पर गाड़ी भेज दी। दिल्ली आने के बाद सागर ने मुझे कॉल किया और बोला कि वो शाम को घर आएगा। अभी वो एयरपोर्ट से सीधा मीटिंग के लिए जा रहा है। मैंने भी अपने ड्राइवर कि बोल दिया के वो पूरा दिन सागर के साथ है रहे ताकि उसे आने जाने में कोई परेशानी ना हो। सागर शाम को 6 बजे आस पास घर वापस आया। जैसे वो गाड़ी से उतरा में तो उसे देखते है रह गई। वो 6 फीट लंबा, भरी हुई बॉडी। जो भी लड़की उसे देख ले वो अपनी चूत को खुजाए बिना नहीं रह सकती। मेरा भी हाल कुछ ऐसा है हो गया था। लेकिन मैंने अपने ऊपर कंट्रोल किया । फिर सागर मेरे पास आया, मुझे नमस्ते करी और हम ने प्यार से एक दूसरे को गले लगा के स्वागत किया। मैंने सागर को आते है नाश्ता करवाया और फिर उसे बोला कि वो फ्रेश हो जाए। करीब एक घंटे बाद सागर कमरे से बाहर आया तो वो शर्ट में था। उस कि छाती बनियान फाड़ के बाहर आ रही थी, बाजू भी फूली हुए थी और पैर भी बिल्कुल शेप में थे। ऐसे बॉडी वाले बंदे बहुत कम मिलते हैं। फिर हम दोनों थोड़ी देर बैठे और बात करी एक दूसरे से। उसने बताया कि कैसे उसकी मीटिंग सफल रही और कल भी उसे जाना हैं वहां। मैंने भी अपनी ननद रूही की खबर ली उस से। हम दोनों 4 साल बाद मिल रहे थे तो बातो बातो में वक़्त कब बीत गया पता है नहीं चला। मैंने नौकर को बोल के डिनर लगवा दिया और फिर दोनों ने मिल की डिनर किया। डिनर के बाद सागर अपने कमरे में चला गया और में अपने काम में व्यस्त हो गई। करीब 10 बजे नौकर भी चले गए। अब घर में सागर और मै अकेले थे। मुझे लगा सागर थका हुआ होगा तो सो गया होगा। मैंने अपने कमरे में आ कर कपड़े बदल कर नाइटी पहन ली। फिर शीशे कि सामने खड़े हो कर अपने आप को निहार ने लगी। अपने बूब्स को अपने हाथो से दबा के देखने लगी जिन का साइज 38 था। गांड भी कम नहीं थी मेरी। 44 का साइज था और बाहर निकले हुए चूतड़। मैं अपने शरीर को निहार ही रही थी कि अचानक दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। मैंने दरवाजा खोला तो देखा सागर खड़ा हुआ था। जैसे है सागर ने मुझे देखा तो मैंने उस की आंखो में एक अलग चमक महसूस करी। शायद वो मेरे बदन को नाइटी मैं देख के निशब्द रह गया हो। फिर कुछ देर बाद बोला।

सागर – माफ करना भाभी, मुझे नींद नहीं आ रही थी तो सोचा आप के साथ बैठ के बात कर लूं। पर अगर आप सोना चाहते हो तो कोई नहीं हम कल बात कर लेंगे।

मैं – अरे नहीं सागर , मैं तो बस ऐसे ही रूम में आ गई थी। चलो बाहर बाल्कनी में बैठ के बात करते हैं।

मैंने सागर से वाइन के लिए पूछा तो उसे ने हां कर दी और मैंने वाइन 2 ग्लास में डाली और बाहर बाल्कनी में बैठ गए। हम दोनों के कुर्सी बराबर में पड़ी हुए थी।

सागर – भाभी आप को देख के हमें बहुत हिम्मत मिलती है। कैसे आप ने सब कुछ खोने के बाद भी अपने आप को टूटने नहीं दिया और अच्छे से सब कुछ संभाल लिया। घर, बच्चे, करोबार। में और रूही हमेशा आप को देख के गर्व महसूस करते हैं।

मैं – सागर यही ज़िन्दगी हैं। किसी के जाने से ज़िन्दगी नहीं रुकती। अपने आप को खुद संभालो कर आगे बढ जाओ। वैसे तुम और रूही वहां बंगलौर में खुश तो हो ना।

मेरे पूछ ने पर सागर खामोश हो गया।

मै – सागर क्या हुआ खामोश क्यो हो गए। क्या तुम लोग वहां खुश नहीं हो। कोई परेशानी हैं। मुझे बताओ मैं मदद करूंगी। आखिर शिवम् की मौत के बाद तुम दोनों मेरी ज़िमेदारी हो।

सागर ने वाइन पीते हुए बोला

भाभी सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है। रूही बहुत खुश हैं वहां और अब तो हमारा बेटा अभिनव भी हैं, जिसने खुशियां दुगनी कर दी हैं।

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मै – और तुम, क्या तुम खुश हो।

सागर – पता नहीं भाभी, पर अभिनव के जन्म के बाद रूही बदल गई है। वो प्यार जो मुझे चाइए वो मुझे उस से नहीं मिल पाता। हमेशा घर के काम, बच्चे की देखभाल, शायद अब यही उस कि लाइफ हैं। जो रूही का प्यार था मेरे लिए अब वो कहीं खो गया है।

मैं समझ गई थी सागर की तकलीफ़ को। शायद यह भी उन मर्दों की तरह ज़िन्दगी जी रहा है जो अपनी वाइफ के साथ रहते तो हैं पर वो प्यार और जरूरत के लिए बाहर ही सहारा ढूंढते हैं

मैं – सागर मैं समझ सकती हूं कि प्यार के बिना ज़िन्दगी कैसे अधूरी हो जाती हैं। में ये ज़िन्दगी जी रही हूं। और मैं नहीं चाहती कि तुम ऐसे ज़िन्दगी जियो इसलिए मैं रूही से बात करूंगी।

सागर – नहीं भाभी, ऐसा मत करना वरना उसे लगेगा की मैंने आप से उसे बुराई करी हैं। आप ने सही कहा श्याद यही लाइफ हैं। वैसे भाभी आप 6 साल से अकेले हो क्या आप को कभी किसी की जरूरत महसूस नहीं हुई। क्या आप को नहीं लगता कि आप को भी जीना चाहिए। वो प्यार आप को भी तो चाहिए।

अब चुप रहने की बारी मेरी थी। थोड़ी देर चुप रहने के बाद मै बोली

मैं – सागर कमी तो बहुत महसूस होती हैं। 6 साल से अधूरी ज़िन्दगी जी रही हूं। सब कुछ हैं मेरे पास आज पर फिर भी अकेली हूं।

सागर – भाभी अगर बुरा ना माने तो पूंछ सकता हूं की क्या भईया के जाने के बाद आप ने कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया।

मैं – नहीं सागर, समाज और ज़िमेदारी के डर से कभी हिम्मत ही नहीं पड़ी।

सागर – क्या आप का में नहीं करता। आप को पूरा हक है खुश रहने का और अपनी जरूरत को पूरा करने में डर कैसा।

इस बात के बाद हम दोनों के बीच खामोशी पसर गई। मैंने कुछ नहीं बोली। करीब एक मिनट बाद मैंने अपने हाथ के ऊपर सागर का हाथ महसूस किया। मैंने कोई प्रतिक्रियाए नहीं दी। फिर अचानक से सागर मेरे हाथ को पकड़ लिया मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया। मुझे मेरी ननद का खयाल आया और मैंने हाथ को छुड़ा के वहां से उठ गई और अपने कमरे में आ कर कुण्डी लगा ली। मेरी धड़कने बहुत तेज चल रही थी। में पलंग पर लेट गई और अपने हाथ को अपनी चूत पर रख दिया। बहुत शांति मिली अपनी चूत को सहलाते हुए। कुछ देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। मैं समझ गई थी कि यह सागर ही हैं। लेकिन कुछ झिझक के बाद मैंने दरवाजा खोल दिया। सगार बाहर खड़ा हुआ था ।

सागर – माफ करना भाभी, मैं आप का दिल नहीं दुखाना चाहता था। पता नहीं कैसे मैंने यह सब कर दिया। आप मुझे माफ कर दीजिए।

सागर बोल ही रहा था कि मैंने उसे अचानक से होंठो पर चूम लिया। शायद मेरी इस अचानक चुम्बन से वो हैरान था लेकिन कुछ पल बाद वो मुझे चूम ने लगा। हम दोनों एक दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे कि बहुत दिन से प्यासे हो। चूमते चूमते वो मुझे बिस्तर पर ले आया। और बेड पर पटक कर मेरे ऊपर आ गया और जोर जोर से मेरे होंठो को चूमने लगा। मैं भी उस का पूरा साथ दे रही थी। कभी मेरी जीभ उसके मुंह में और कभी उस की मेरे मुंह में। ऐसे करीब 5 मिनट तक चलता रहा फिर सागर ने अपना हाथ मेरे चूचे पर रखा और उसे दबाने लगा। मेरी सिसकारी निकल गई। फिर वो उठा और मेरी नाइटी को निकाल दिया। मैं अब बस ब्रा और कच्छी में उस के सामने लेटी हुई थी।

मेरे शरीर को वो देखता ही रह गया और बोला –

भाभी सच में आप कयामत है। मैंने ऐसा शरीर आज तक नहीं देखा। आप के चूचे आप की ब्रा को फाड़ के बाहर आ रहे हैं
और यह बोलते ही उस ने अपना मुंह मेरे चूचे के बीच में रख दिया और सूंघ ने लगा मेरे चूचे की खुशबू को। फिर उसने मेरी ब्रा को अलग कर मेरे दोनों चूचों को रिहा कर दिया। और मेरे मलाई जैसे चूचे अपने हाथो से दबाने लगा।

मैं – सागर, खा जाओ अपनी भाभी के चूचे को। बहुत दिन से तड़प रहे हैं यह एक मर्द के लिए।

मेरे बोलते ही सागर ने मेरे एक चूचे को अपने मुंह में भर लिया और एक को अपने हाथ से दबाने लगा।
आह ! क्या मज़ा आ रहा था। सागर की जीभ मेरे चूचे की दाने पर चल रही थी। वो बीच बीच में हल्के से चूचे पर दांत से काट लेता और मैं सिहर उठती उस की इस हरकत से। करीब ऐसा 10 मिनट तक ऐसे ही चलता रहा। फिर सागर उठा और मैं भी उठ गई। सागर ने अपनी टीशर्ट उतार दी। हाय ! क्या बॉडी थी। मैं पागल हो गई उस की भरी हुई छाती और बाजू को देख के। मैंने उसे बाहों में भर लिया और उस की छाती को अपने होंठो से चूम ने लगी। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उस के निक्कर को उतार दिया। अब वो बस खाली अंडरवियर में खड़ा था। उस का लन्ड अंडरवियर फाड़ के बाहर आने को तड़प रहा था। में घुटनों के बल बैठ गई और उसे लंड को ऊपर से चूम लिया।

सागर – भाभी रिहा कर दो इसको और दे दो इसे वो सुख जो इसे चाहिए। मैंने उस के अंडरवियर को उतार दिया। जैसे ही उतरा तो उसका 8 इंच लंबा लंड फंकार भरता हुआ मेरी आंखो के सामने आ गया। मैंने उसे हाथो मै लिया और सहलाने लगी। थोड़ी देर बाद मैं लंड को सूंघ के उस की खुशबू का आनंद लेने लगी। बहुत सालों बाद लंड कि खुशबू को सूंघ रही थी मैं। मैंने अपनी जीभ निकाली और सागर के लंड के सुपाड़े पर फिराने लगी। मेरी इस हरकत से सागर की सिसकारी निकल गई और उसने मेरे सिर को पकड़ के लंड को मुंह में दे दिया। मैंने भी पूरा लंड अपने मुंह में के लिया। जब लंड हलक तक गया तो मेरी आंखो में पानी आ गया। पर में फिर भी लंड को चूसती रही। आह क्या मज़ा था।
धीरे धीरे सागर भी लंड को अन्दर बाहर करने लगा।

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सागर की सिसकारी से में भी जोश में आ गईं और तेज तेज लंड को चूसने लगीं ।

ऐसा कोई दस मिनट तक चला होगा । फिर मेरे घुटनों में दर्द होने लगा और मैं उठ गईं.
उसके बाद वो बेड पर लेट गईं.

अब सागर बेड पर आ गयाऔर मेरे मुंह पर बैठ कर अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया.

मैं लंड चूसने लगीं. लंड पूरा हलक के अन्दर तक जा रहा था. मैं ऐसे लंड को चूस नहीं पा रही थी
मैंने सागर को बेड पर धकेला और उसके ऊपर आकर लंड चूसने लगीं.

सागर पूरा मर्द था दूर दूर तक झड़ने का नाम नहीं था। थोडी देर बाद उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और एक हाथ मेरी पैंटी के ऊपर रख कर उसे सहलाने लगा और एक चूचे पर रख दिया.

सागर – भाभी, आप की चूत गीली हो गई है। देखो कच्छी पूरी भीग गई है।

मैं – सागर उतार दो इसे। यह पानी तुम्हारे नाम का हैं . सागर ने मेरी काली कच्छी को मेरी मोटी झंगो से होते हुए उतार दिया और मेरी चूत को देखते हुए बोला

सागर – भाभी, क्या चूत हैं आप की. कसम से मैंने आज तक इतनी फूली और चिकनी चूत नहीं देखी। मुझे लगा था बाल होंगे पर यह तो एक दम साफ़ है.

इतना कहते ही सागर ने मेरी चूत पर अपना मुंह रख दिया. मैं पागल हो गई थी. कोई आज 6 साल बाद मेरी चूत को चाट रहा था. फिर सागर ने धीरे धीरे अपनी जीभ से मेरी पूरी चूत से निकले पानी को चाटा और फिर वही जीभ चूत के अंदर डाल दी . मैं पागल हो गई और उसका सिर पकड़ के पूरा चूत के अंदर घुसा दिया.

सागर मेरी चूत को चाटे जा रहा था और में पागलों की तरह बोले जा रही थीं – हां मेरे राजा … खा जाओ मेरी चूत … आह डाल दो अपनी जीभ पूरी अन्दर … और तेज करो, आह और तेज … आह आह आह.

करीब 5 मिनट तक चूत चाटने के बाद सागर ने मुझे उठाया और वो खुद नीचे लेट गया और मुझे अपने मुंह पर बैठा कर मेरी चूत कि खुशबू लेने लगा और फिर मैं भी अपनी चूत को हिला हिला कर चटवाने लगीं. सागर मेरी चूत को ऐसे चाट रहा था जैसे बहुत दिन से भूखा हो. उसने पूरे जीभ मेरी चूत में डाली और अपने दोनों मेरी चूत के होंठो से लगा लिए और मेरे मोटे चूतड़ों पर हाथ रख के चाटने लगा और मैं इस हरकत से आनंद में रोने लगी. चूत चटवाने में औरत को कितना सुख आता है यह बस एक औरत है जान सकती हैं. अचानक से मेरे पैर कांपने लगे और मेरा शरीर अकड़ गया. एक दम से चूत में से तेज पानी की धार निकली को सीधा सागर के मुंह में गई। सागर ने मेरी चूत का पूरा पानी पिया और चाट चाट के चूत को साफ कर दिया । फिर में उस के मुंह से उतर के बेड पर लेट गई। बहुत दिनों बाद सुकून महसूस हुआ। सागर भी मेरे बराबर में लेट गया और मैं उसकी छाती पर सिर रख के लेट गई। पता नहीं कब आंख लग गई।
करीब 15 मिनट बाद आंख खुली तो सागर जग रहा था और वो मेरी गान्ड को सहला रहा था। उस का लंड अब भी खड़ा था। मुझे जगा देख सागर ने मेरी चूत पर चूम लिया और फिर मेरे होंठो को।अब वो वक़्त आ गया था जब मेरी चूत को लंड मिलने वाला था। सागर उठा और मेरी दोनों टांगों को उठा लिया और मेरी चूत के ऊपर अपने लंड को फिराने लगे.

मैं – तड़पाओ मत जान… अब डाल दो इस चूत के अन्दर!
सागर – चिंता मत करो जान… आज तो आप की चूत का भरता बना दूंगा। सारी प्यास मिटा दूंगा इस की।
मॉम- तो डाल दो न। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा.

इतना कहते ही सागर ने एक झटके के साथ आधा लंड मेरी चूत में उतार दिया।
लंड घुसते ही मैं एकदम से चिल्ला उठीं। ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरी चूत चीर डाली हो

मैं- आई मर गई … आह निकाल लो इसे. मुझसे सहन नहीं हो रहा … प्लीज़ रहम करो मेरे ऊपर … मैं मर जाऊंगी.
मैं ये बोल ही रही थीं कि सागर ने बचा हुआ लंड भी चूत में पेल दिया।

इस बार तो मैं बदहवास सी हो गईं। मेरी आंखो से आंसू आ गए।

अचानक से सागर मेरे होंठों को चूसने लगा और लंड मेरी की चूत में डाले रखा.

कुछ बाद जब मेरा का दर्द बंद हुआ, तो मैं भी सागर को चूमने लगीं।
अब सागर को पता चल चुका था कि मैं चुदने को तैयार हो गई हूं। सागर धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा।

जैसे ही लंड अपनी जगह पूरी तरह से बनाई तो मैं भी धक्के के मज़े लेने लगीं, सागर ने स्पीड तेज कर दी.
वो तेज तेज अपनी मोटी गांड को हिला कर मेरी चूत में धक्के लगा रहा था और बोल रहा था

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सागर – भाभी क्या गरम चूत हैं आप की। मेरा पूरा लंड गर्मी के मारे जोश पर हैं … आह ! चुदलो आज जी भर के इस लंड से। आज इस चूत का भोसड़ा बना दूंगा… बहुत प्यासी थी आपकी चुत … आह इसकी सारी प्यास मिटा दूंगा

मैं भी अब अपनी मोटी गांड उठा उठा कर सागर का साथ दे रही थीं और बोल रही थीं.

मैं – आह आह आह … चोदो मेरे राजा फाड़ दो इस चूत को … बना दो इस का भोसड़ा … चोदो मेरे राजा … चोदो बहुत प्यासी है यह चूत । इसे हमेशा तुम जैसे मर्द की जरूरत है।

सागर का एक एक झटका मुझे सुख का आनंद दे रहा था। ऐसा सुख जिस के लिए मैं बरसो से प्यासी थी।

करीब 5 मिनट ऐसे चोदने के बाद सागर ने मुझे घोड़ी बना दिया और पीछे से मेरी चूत में लंड डाल के चुदाई चालू कर दी। मेरी मोटी गांड हिलते देख वो और जोश मैं आ गया और तेज़ तेज़ चोदते हुए चूतड़ पर हाथ मारने लगा।
अब चुदाई का नंगा नाच चालू हो गया कभी में सागर के ऊपर और कभी सागर मेरे ऊपर। करीब 20 मिनट तक ऐसे चुदाई चली और फिर वक़्त आया चूत के झड़ने का।
मेरा शरीर अकड़ ने लगा और मैं फिर से झड़ गईं। लेकिन सागर नहीं झड़ा। सच में ऐसा मर्द मैंने आज तक नहीं देखा जिस ने मुझे पहले जीभ से झाड़ा और फिर लंड से और खुद एक बार भी नहीं झड़ा।

सागर ने मेरी चूत का माल अपनी जीभ से साफ़ किया और वही लेट के हम दोनों सो गए। रात के 3 बजे मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरी गांड में उंगली डाल रहा है। मेरी आंख खुली तो देखा सागर मेरी गांड के सामने मुंह कर के लेटा हुआ हैं और अपनी उंगली मेरी गांड पर चला रहा है। मैं समझ गई की सागर अब मेरी गांड मारना चाहता है। मैंने कुछ नहीं बोला। सागर ने मुझे जगा देखा तो दोनों हाथ से मेरे चूतड़ खोले और गांड के छेद पर जीभ रख दी। उसके बाद कस के मेरी गांड के छेद को चाटने लगा। मज़ा आ रहा था गांड चटवाने में। फिर उठा और मुझे घोड़ी बना के और गांड फैला के चाटने लगा। जीभ को चूत से फिराता हुआ गांड तक लाता । बहुत मज़ा आ रहा था पर डर भी लग रहा था के गांड में लंड लेना पड़ेगा। मैंने आज तक गांड़ नहीं मरवाई। सागर ने मेरे मेकअप बॉक्स से क्रीम उठाई और बहुत सारी मेरे गांड के छेद पर लगा दी और गांड के छेद में उंगली डाल के मालिश करने लगा। उसके बाद अपने लंड पर बहुत सारे क्रीम लगा के मेरी गांड के छेद पर लंड रखा और धीरे से अपना सुपाड़ा डाला। मै दर्द के मारे उछल गई और उसने मुझे कंधो से पकड़ लिया और फिर एक ओर झटके में आधा लंड मेरी गांड के अंदर डाल दिया। में दर्द से उछल गई पर सागर की पकड़ बहुत अच्छी थी तो में हिल नहीं पाई लेकिन दर्द सहन नहीं हो रहा था। करीब 2 मिनट तक सागर ने लंड ऐसा ही रखा और फिर जब मेरा दर्द काम हुए तो एक झटके से पूरा लंड गांड के अन्दर घुसा दिया। अब मेरी आंखो से आंसू आने चालू हो गए और मैं दर्द के मारे हिल भी नहीं पा रही थी। सागर ने करीब 2 मिनट तक फिर से पूरा लंड अंदर ही रखा और जब मैं नॉर्मल हो गई तो धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगा। थोडी देर बार मुझे मज़ा आने लगा। वो दर्द भी मुझे मज़ा दे रहा था। तब सागर को लगा कि मैं मज़े ले रही हूं तो उसने झटके तेज़ कर दिए और मेरी मोटी गांड को चोदने लगा। मेरे मोटे चूतड़ उसके झटको से हिल रहे थे। सागर मेरी गांड को पीटते हुए चोदने लगा और मैं भी मज़े ले रही थी। अचानक 10 मिनट बाद सागर तेज़ तेज़ सांस लेता हुआ मेरी गांड के अंदर झड़ गया। मैं उठी और देखा के मेरी गांड से वीर्य की धार निकल रही हैं। मैंने उसे साफ किया। फिर गरम पानी से नहा के हम दोनों नंगे है एक दूसरे की बाहों में सो गए। कसम से करीब 6 साल बाद इतनी सुकून की नींद मिली थी मुझे। उसके बाद सागर 2 दिन और वह रहा के हम ने जम के चुदाई के मज़े लिए। घर का ऐसा कोई कोना नहीं बचा जहा उसने मुझे ना चोदा हो। 2 दिन बाद जब वो गया तो बुरा तो बहुत लगा पर शायद यही ज़िन्दगी हैं। उस दिन के बाद सागर और में अक्सर बात करने लगे। आज भी हम इतना है करीब हैं जितना 3 साल पहले थे।

दोस्तो आशा करती हूं कि आप को मेरी यह कहानी पसंद आई होंगी।
अगर इस सेक्स कहानी पर कोई अपनी राय मुझे भेजना चाहता है, तो जरूर भेज सकता है.
आप लोगों के सामने में अपनी नई सेक्स कहानी लेकर दोबारा वापस आऊंगी।

मेरी ईमेल आईडी है
kavitashrm1075@gmail.com

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